संयुक्त निदेशक ही फर्जी डिग्री के सहारे नौकरी कर रहे हैं तो भला फर्जी डिग्री वाले शिक्षकों पर कैसे कार्यवाही

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जब शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक ही फर्जी डिग्री के सहारे नौकरी कर रहे हैं तो भला फर्जी डिग्री वाले शिक्षकों पर कैसे कार्यवाही होगी !

उत्तराखंड राज्य मे अपर शिक्षा निदेशक कुमांऊ नैनीताल के पद पर सन 2017-2018 मे कार्यरत विद्यालयी शिक्षा विभाग के शिक्षा अधिकारी हल्द्वानी निवासी मुकुल कुमार सती ने एच एन इन्टर कालेज हल्द्वानी मे सन1989-90 मे नौकरी के साथ-साथ हल्द्वानी से 100 किमी दूर कुमांऊ विश्वविद्यालय के अल्मोडा बीएड संकाय से संस्थागत छात्र के रूप मे बीएड की संस्थागत डिग्री फर्जीवाडा करके प्राप्त की। बाद मे बीएड की डिग्री को अविभाजित उत्तर-प्रदेश लोकसेवाआयोग/शासन मे पेश करके शिक्षा विभाग मे नौकरी भी प्राप्त कर ली। इस मामले की जांच जीरो टोलरेंस की सरकार ने फाइलों मे दफन कर रखी है।

अगर फर्जीवाड़े के इस मामले मे सरकार ने गम्भीरता से कार्यवाही की तो मुकुल कुमार सती ( वर्तमान प्रचार्य डाइट भीमताल,नैनीताल) का नौकरी से जाना भी तय है।

कुमांऊ विश्वविद्यालय की सीनेट के सदस्य हुकम सिंह कुंवर ने विश्वविद्यालय के पंजीकृत स्नातक भाष्कर चन्द्र की शिकायत के आधार पर राज्यपाल/ मुख्यमंत्री उत्तराखंड शासन को शिकायत की गयी थी, जिसकी जांच तीन माह पूर्व पुलिस मुख्यालय /एसएसपी नैनीताल के आदेश प्रभारी निरीक्षक कोतवाली नैनीताल

आशा बिष्ट का कहना है कि शिकायतकर्ताओं के शिकायत की जांच के दौरान के सारे सबूत एकत्र करके जांच रिपोर्ट शासन को भेजने की कार्यवाही की जा रही है। सवाल यह है आखिर दो साल से जीरो टोलरेंस की सरकार जांच दबाकर क्यों बैठी है !

मजेदार बात यह है कि जांच अधिकारी ने फर्जी ढंग से नौकरी प्राप्त करने वाले मुकुल सती से अभी तक इस मामले में बयान तक नहीं लिए हैं, जब आशा बिष्ट से पूछा तो जांच अधिकारी ने कहा कि इसकी जरूरत नही थी। भला यह कैसी जांच है !

मुकुल सती के द्वारा सन1989-90 मे एचएनइन्टर कालेज हल्द्वानी मे इन्टर साइन्स की मान्यता मिलने पर 19/07/1989 से लेकर14/05/1990तक हल्द्वानी मे प्रवक्ता जीव विज्ञान ,रसायन विज्ञान के पद पर शिक्षण कार्य करते हुये हल्द्वानी से 100 किमी दूर बीएड की कक्षा मे उपस्थित होकर 75%उपस्थिति पूर्ण करना संभव नही है ।कुलपति कुमांऊ विश्वविद्यालय ने भी लिखित रूप मे अवगत कराया है कि

“कोई भी व्यक्ति कक्षा मे 75%उपस्थिति के बगैर संस्थागत छात्र के रूप मे बीएड की परीक्षा मे शामिल नही हो सकता है तथा निजी संस्थाओं मे नौकरी करते हुए बीएड की डिग्री प्राप्त नही कर सकता है।”

ऐसे मे मुकुल कुमार सती की 1989-90 मे नौकरी करते हुये कुमांऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त बीएड की डिग्री की आड़ पर नौकरी पूर्णतः अवैध है।

इस मामले मे हल्द्वानी निवासी भाष्कर चन्द्र ,मोहन राम आर्य, प्रकाश भट्ट,नवीन पाठक ने मुकुल कुमार सती को नौकरी से बर्खास्त करने व एफआईआर दर्ज करने के लिये राज्यपाल/मुख्यमंत्री/मुख्यसचिव को शपथपत्र सहित शिकायतें भेजी हैं, लेकिन प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत कई दफा कह चुके हैं कि प्रदेश में भ्रष्टाचार नहीं है इसलिए लोकायुक्त की भी जरूरत नहीं है। आखिर इसी को तो जीरो टोलरेंस की सरकार कहते हैं !

 

 

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