बरेली के सभी सरकारी भवन फ्लाईऐश ईंटों से बनेंगे इस ईंट को बनाने के लिए तीन फर्मों को मंजूरी

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अब सभी सरकारी भवन फ्लाईऐश ईंटों से बनेंगे इस ईंट को बनाने के लिए तीन फर्मों को मंजूरी

बरेली,  । अब सभी सरकारी भवन फ्लाईऐश ईंटों से बनेंगे। ईंटें चूना और पीओपी के मिश्रण से तैयार की जाएंगी। इससे पर्यावरण संरक्षित होगा। इस ईंट को बनाने के लिए तीन फर्मों को मंजूरी दी गई है। जबकि बीडीए ने अपने क्षेत्र में निर्मित होने वाले भवनों को इस ईंट से बनाने के लिए लोगों को जागरूक कर रहा है।

सरकारी भवनों के निर्माण में लगने वाली सीमेंट और ईंट भठ्ठों की ईंट से होने वाले पर्यावरण के खतरे को ध्यान में रखते हुये नई कार्य योजना तैयार की गई है। निर्माण कार्य के जानकारों की बातों पर गौर किया जाए तो फ्लाईऐश ईंट काफी मजूबत होती हैं। इससे पहले इन ईंटों का प्रयोग बड़े भवनों में किया जा रहा है।

सबसे अधिक उन शहरों में इस ईंट के प्रयोग करने के लिये कहा गया है, जहां पड़ोस या जनपद में थर्मल पवार सेंटर हैं। बरेली के नजदीक शाहजहांपुर में प्राइवेट बिजली उत्पादन केन्द्र होने के कारण आसानी से निर्माण करने वाली संस्था को फ्लाईऐश उपलब्ध हो जाएगा। इसके चलते शहर में बनने वाली सरकारी भवनों में इस ईंट का प्रयोग होगा। शासन जनपद की तीन फर्मों को ईंट बनाने की अनुमत्ति प्रदान की है।

कैसे बनती है ईंट
यह ईंट चूना, पीओपी और फ्लाईऐश से मिलाकर बनायी जायेगी। इसमें बिजली उत्पादन केन्द्रों से बंद ट्रकों से फ्लाईऐश लाया जायेगा। इसके लिए परिसर में ही प्लांट की स्थापना की जायेगी। चूना और पीओपी (प्लास्टर आफ पेरिस) का मिश्रण सांचे में ढाल दिया जायेगा। एक मशीन से हर रोज दस हजार ईंट तैयार होगी।

धूप में तैयार होगी ईंट
ईंट को पकाने के लिये किसी भी प्रकार के ईधन की आवश्यकता नहीं होगी। इन्हें धूप में ही पकाया जाएगा। सांचे में ढालने के छह घंटे में ईंट सख्त हो जायेगी। पांच से छह दिन में इन ईंटों का निर्माण में प्रयोग किया जा सकेगा।

“बीडीए फ्लाईऐश की ईंट से भवन निर्माण पर जोर दे रहा है। इससे पर्यावरण को काफी फायदा मिलता है। पहले इसे बड़े भवनो में प्रयोग किया जाता था। लेकिन अब आम लोगों को भी जागरूक किया जा है कि इस ईंट का प्रयोग करें। अब शासन ने सभी सरकारी भवनों को इसी ईंट से बनने का निर्देंश दिया है।” -राजीव कुमार, अवर अभियंता

 

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