पिरान कलियर का एक कार्यालय भ्र्ष्टाचार का अड्डा बनकर रह गया

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*उच्च अधिकारी की परोकारी से एक कार्यालय में तैनात कर्मचारी का कारनामा*

*मोटी रकम की एवज में करता है सरकारी कागज लीक,चर्चा जोरों पर

पिरान कलियर का एक कार्यालय भ्र्ष्टाचार का अड्डा बनकर रह गया है जबकि इस कार्यालय की देखरेख व वित्त का जिम्मा जिले के उच्च अधिकारी पर होने के बावजूद भ्र्ष्टाचार खत्म होने का नाम नही ले रहा है।
*यहां यह भी बताते चले कि इस कार्यालय में तैनात कर्मचारी (क्लर्क)इतने बेलगाम हो गए है कि कार्यालय की पत्रावलियों के जरूरी कागजात अधिकारियों के सामने जाने के बजाय पहले सम्बन्धित लोगो के पास पहुंच रहे है।यह कार्यालय कर्मचारियों की जेब गर्म करने का अड्डा बन चुका है।सूत्र बताते है कि इस कार्यालय से सम्बंधित नोटिंग वाली फाइल की फोटो कॉपी लेकर कार्यालय में कथित तौर पर नव नियुक्त चपरासी* (जिसकी नियुक्ति तीन अन्य व्यक्तियों के साथ म्रतक आश्रित कोटे से महा भृष्ट वक्फ बोर्ड सी ई ओ अलीम अंसारी ने मोटी रकम लेकर बिना उच्च अधिकारी की संस्तुति के ही कार्यालय में कर डाली ओर इस पूरे खेल में इस क्लर्क की भी संलिप्तता बताई जा रही है)
*ने उच्च अधिकारी के समक्ष पहुंचकर कॉपी देने वाले बाबू की कारगुजारी से उच्च अधिकारी को अवगत कराने के लिये जैसे ही उनके सामने उक्त कागजात रखे तो उस अधिकारी का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया ओर शिकायत करता के खिलाफ रेकॉर्ड चोरी के आरोप में मुकद्दमा लिखने की बात कहकर कार्यालय में ही अपने सिक्योरिटी कार्ड से रुकवा दिया।उच्च अधिकारी द्वारा ऑफिसियल व पब्लिक कार्यो से निपटने के बाद उस कथित नियुक्ति पाए चपरासी से पूछताछ की गई तो नोटिंग कागजात के बारे में नया खुलासा कर कार्यालय में तैनात क्लर्क द्वारा दिये गए बताये। जिस पर उस उच्च अधिकारी द्वारा तत्काल सम्बन्धित क्लर्क को अपने आफिस बुलाया गया और पूछताछ की गई।बताया जा रहा है कि क्लर्क ने भी कागजात देने की घटना को झूटी बताकर अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश की है ।लेकिन इसी क्लर्क को इस उच्च अधिकारी द्वारा नियुक्ति की जांच में स्वयं परोकारी कर जिला अधिकारी की जांच से बचाया गया था।उस वक्त उच्च अधिकारी को इस क्लर्क की कारगुजारियों की जानकारी नही थी।यह भी नही मालूम था,,,,, कि दूध की रखवाली बिल्ली ,,,,,वाली कहावत सच मे सिद्धारत हो जाएगी।अब इस घटना से कार्यालय में तैनात क्लर्क की कारगुजारियों की पोल खुलने से उच्च अधिकारी क्या कार्यवाही कर पाते है यह जांच का विषय जनता में चर्चा आम हो रही है।

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