परिवहन निगम के रुद्रपर व काशीपुर बस स्टेशन पीपीपी मॉडल पर बनेगा?

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रुद्रपर:-परिवहन निगम के बस अडडों को आधुनिक बस टर्मिनल बनाने कवायद पिछले लग-भग कई सालों से चर्चा में चली आ रही है दसियों जांचें हो चुकी इसको कार्यदायी संस्था सीआरएस इंफ्रा प्रोजेक्ट लि० को कई साल पहले मिला बताया जाता है लेकिन कार्य शुरू होने का नाम केवल पिछले वर्ष कार्यदायी संस्था द्वारा केवल रुद्रपर डिपो परिसर में बसों के दोनो प्रवेश द्वार पर बैरियर लगाकर सिक्योरिटी के जावान तैनात किए गये बसों के प्रवेश पर कट रही शुल्क रसीद काटने की अनुमति नहीं मिली सिक्योरिटी को हटा दिया गया परिसर में लोहे कि रेलिंग जो आज भी लगी है,जिस स्थान पर पैसिंजर बैठते है उस जगह बैठने मैटल कुर्सियां डालकर एक रूम में संस्था ने अपना कार्यालय दूसरे में ला लेबर के सोने के लिए ले रखा है,परिसर में पैसिंजरों के लिए शौचालय है उसका किराया कार्यदायी संस्था पिछले वर्ष से ले रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार गत वर्ष कार्यदायी संस्था को तब झटका लगा जब विकास प्राधिकरण ने प्रस्तुत किया गया टर्मिनल का नक्शे पर कड़ी आपत्ति लगाकर फेल कर दिया दूसरा देने को कहा गया।प्रस्तुत नक्शे में परिवहन निगम रुद्रपर डिपो की अपनी भूमि 16.855 वर्ग मीटर में मानक से अधिक कॉमर्शियल का उपयोग दिखाया गया जिस पर आपत्ति लगने के बाद टर्मिनल खटाई में पड़ गया।जबकि रोडवेज की कुल भूमि पर केवल 25 प्रतिशत भूमि व्यवसायिक उपयोग में लायी जा सकती है,व्यवसायिक साथ 2.78 वर्ग मीटर में वर्कशाप का निर्माण होना है।कार्यदायी संस्था ने मानक को पलटकर अपनी मर्ज़ी का नक्शा बनाकर विभाग को दिया गया था,नक्शे में 25 प्रतिशत व्यवसायिक के स्थान पर 71.48 प्रतिशत भूमि दिखाई गई थी।मानक के अनुरूप न होने से टाउनशिप प्लानर संयुक्त नियोजक हल्द्वानी ने नक्शे को गलत साबित कर आपत्ति लगा दी नक्शा पास नहीं हुआ।कार्यदायी संस्था द्वारा दूसरा शीघ्र देने के आश्वासन समय कटता रहा।
अब 11 मार्च 2019 के एक दैनिक समाचार पत्र में समाचार छपा की अप्रैल के प्रथम सप्ताह कार्यदायी संस्था अपना काम शुरू कर देगी,नक्शा पास भी नहीं हुआ ज़िला विकास प्राधिकरण कि होने वाली बोर्ड की बैठक में फिर नक्शे की जांच होनी है फिर फैसला लिया जाएगा।समाचार के अनुसार रुद्रपर बसस्टैंड 50 करोड़ की लागत का होगा,काशीपुर डिपो का कहीं नाम नहीं है जबकि दोनो बनाये जाने की बात दो साल पहले से चल रही है।इस टर्मिनल के निर्माण में और शर्तें क्या हैं ये सिर्फ परिवहन निगम के उच्चाधिकारी ही जानते हैं।अभी निगम के किसी उच्चाधिकारी की अधिकृत घोषणा नहीं हुई है।केवल अखबार छाप रहे हैं,इसके पीछे कुछ राजनीति हो सकती है।लोकसभा का चुनाव अगले महीने है सारा प्रशासन व्यस्थ है।आगामी समय बतायेगा क्या होगा इसकी प्रतीक्षा लोग कर रहे हैं।कार्यदायी संस्था के प्रतिनिधि इन्द्र कपूर देहली से जब भी आते है मुलाक़ात नही हो पाती कमरा बस स्टेशन पर बन्द कमरे में डिपो प्रशासन से सम्पर्क में रहते देखा गया कि कुछ व्यवसायिक ठेकेदार मिलने के लिए परेशान रहते हैं।

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