देहरादून. एक आईपीएस ऐसा भी जिसकी छवि विभाग में ईमानदार अफसर के रूप में जानी जाती है युवा चेहरे के साथ-साथ आईपीएस अफसर अरुण मोहन जोशी वर्तमान में देहरादून जिले के एसएसपी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं

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देहरादून. एक आईपीएस ऐसा भी जिसकी छवि विभाग में ईमानदार अफसर के रूप में जानी जाती है युवा चेहरे के साथ-साथ आईपीएस अफसर अरुण मोहन जोशी वर्तमान में देहरादून जिले के एसएसपी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं इस युवा आईपीएस अफसर के बारे में माना जाता है कि जो कोई भी इनके पास फरियाद लेकर पहुंचा तो उसकी फरियाद को कभी भी खाली नहीं जाने दिया गया वाकया देहरादून में ही अक्सर देखा जाता है जो कोई भी पुलिस अफसर के पास अपनी शिकायत लेकर पहुंचता है तो फिर उस पर कार्रवाई होना तय मानी जाती है.

आईपीएस अफसर अरुण मोहन जोशी अपनी कार्यशैली के साथ-साथ युवा फैंस के बीच भी काफी फेमस है उनके फैन लगातार उनसे जुड़ी हुई हर घटना और उनकी जानकारी से अपडेट रहते हैं फैंस की दीवानगी कुछ इस कदर है कि हर कोई उनसे मिलने को बेताब रहता है.

देहरादून के ही कुछ फैंस उनसे मिलने के लिए पिछले लंबे समय से बेताब बताए जाते हैं लेकिन अभी तक उनको आईपीएस अरुण मोहन जोशी से मिलने का मौका नहीं मिल पाया है वह सोशल मीडिया पर ही आईपीएस अरुण मोहन जोशी की हर अपडेट देखते रहते हैं आईपीएस अरुण मोहन जोशी का 12 अगस्त को जन्मदिन है तो ऐसे में युवा फैंस चाहते हैं कि आईपीएस अरुण मोहन जोशी से उनकी एक मुलाकात हो जाए और सेल्फी लेकर उनकी मुराद पूरी हो जाए.

ऐसा पहली बार नहीं है जब किसी युवा अफसर के फैन उनको पसंद करते हैं लेकिन आईपीएस अरुण मोहन जोशी की कुछ बातें इस कदर निराली है कि लोग उनकी तरफ आकर्षित होते चले जाते हैं लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए अलग से कुछ भी नहीं करते सिर्फ उनकी कार्यशैली और बातें इतनी सटीक और सुलझी हुई होती है कि हर कोई उनकी तरफ आकर्षित होता हुआ नजर आता है.

यह कार्यशैली आईपीएस अरुण मोहन जोशी के अंदर देहरादून जिले के एसएसपी पद पर रहते हुए भी साफ नजर आती है.

आईपीएस अफसर की जन्मभूमि बनी कर्मभूमि: अरुण मोहन जोशी जी का जन्म एक साधारण मध्य वर्गीय परिवार में ग्राम मुंधौल, त्यूनी, जिला देहरादून में 12 अगस्त 1983 को हुआ था। पिता श्री कर्मचंद जोशी ग्राम पंचायत अधिकारी थे और माँ तारा जोशी जी एक साधारण गृहणी,अरुण मोहन जोशी की प्रारम्भिक शिक्षा हरिद्वार में हुई और अपने अथक प्रयास के चलते IIT रूड़की में B.TECH करने पहुंच गए। समाज के लिए कुछ करने की चेष्टा इन्हें UPSC में लेकर लायी और उसके बाद ही IPS बन गए।2006 बैच के एक ऐसे IPS अधिकारी जिन्होंने अपनी जन्मभूमि को ही अपनी कर्मभूमि चुना, उत्तराखंड को। उसके बाद कि कहानी वही है जो हर ईमानदार अफसर की होती है।

हरिद्वार के कुख्य्यात खनन माफिया को लपेट दिया और परिणाम यह हुआ कि अगले कई साल इन्हें बेंच पर बैठा दिया गया, अब ईमानदार अफसर इस भ्रष्ठ तंत्र में कब तक निर्भीख हो लड़ सकता है? पर यह अफसर अलग था। अपना करियर दांव पर लगा दिया पर ईमान नही बेचा।

 

 

 

 

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