छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी का निधन 74 साल की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। अजीत जोगी का अंतिम संस्कार शनिवार को होगा

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छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी का निधन  74 साल की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। अजीत जोगी का अंतिम संस्कार शनिवार को होगा

रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी का निधन हो गया। 74 साल की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। अजीत जोगी को कार्डियक अरेस्ट के बाद अस्तपाल में भर्ती कराया गया था। अमित जोगी के ट्विटर अकाउंट के जरिये जानकारी दी गयी है कि अजीत जोगी का अंतिम संस्कार उनकी जन्मभूमि गौरेला में कल यानी कि शनिवार को होगा।

बता दें कि रायपुर के अस्पताल में 21 दिनों से उनका इलाज चल रहा था। मिली जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार को भी उन्हें एक कार्डियक अरेस्ट आया था, जिसके बाद उनकी हालत ज्यादा गंभीर हो गई थी। शुक्रवार को राजधानी रायपुर के नारायण हॉस्पिटल में अजीत जोगी ने अंतिम सांस ली।

जोगी राजधानी रायपुर के नारायणा अस्पताल में पिछले 21 दिनों से उनका उपचार चल रहा है। जोगी तभी से कोमा में थे। अस्पताल के डायरेक्टर डॉ सुनील खेमका और डॉ पंकज ओमर के नेतृत्व में विशेषज्ञों की टीम लगातार 24 घंटों तक उनके स्वास्थ्य की निगरानी में जुटी थी।

जोगी को 9 मई को कार्डियक अरेस्ट के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पूर्व मुख्यमंत्री के स्टाफ ने बताया कि 9 मई को सुबह नाश्ता करते हुए जोगी को अचानक सीने में दर्द महसूस हुआ और सांस लेने में दिक्कत होने लगी। पत्नी रेणु जोगी इनके पास थीं और उन्होंने ही घर पर मौजूद स्टाफ को इसकी जानकारी दी। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया और स्थिति गंभीर होने के चलते वेंटिलेटर पर रखा गया था। पिता की तबीयत खराब होने की सूचना मिलते ही बेटे अमित जोगी भी बिलासपुर पहुंच गए थे।

अलग छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद पहले मुख्यमंत्री बने जोगी अपने अंतिम समय में छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस पार्टी से जुड़े थे। उन्होंने खुद ही इस पार्टी का गठन किया था। हालांकि, इससे पहले उन्होंने कांग्रेस में लंबी पारी खेली। आईएएस की नौकरी छोड़ राजनीति में आए जोगी राज्य विधानसभा, लोकसभा, राज्यसभा और केंद्रीय कैबिनेट के सदस्य रहे।

छत्तीसगढ़ के गठन के साथ ही अजीत जोगी राज्य की सियासत के धुरी बन गए। छत्तीसगढ़ की राजनीति हमेशा अजीत जोगी के इर्द-गिर्द घुमती रही है। अजीत जोगी ने वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री पद की पहली बार शपथ ली तो उनका वो बयान इतिहास के पन्नों में उन अमिट पंक्तियों की तरह दर्ज हो गया जिसे हर राजनीतिक विश्लेषक बार-बार दोहराता है। दो बार राज्यसभा सदस्य, दो बार लोकसभा सदस्य, एक बार मुख्यमंत्री रहने के अलावा उनके खाते में कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रहने का रिकॉर्ड भी दर्ज है।

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