गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विष्वविद्यालय में विश्व मात्स्यिकी दिवस विष्वविद्यालय में मनाया गया

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गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विष्वविद्यालय
में विश्व मात्स्यिकी दिवस विष्वविद्यालय में मनाया गया*
पंतनगर। 21 नवम्बर, 2020। विष्वविद्यालय के मत्स्य विज्ञान महाविद्यालय में विश्व मात्स्यिकी दिवस के अवसर पर आज एक कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसका विषय ‘विश्व में देश की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा में मात्स्यिकी क्षेत्र के योगदान’ था। कार्यक्रम मंें मुख्य अतिथि के रूप में निदेषक शोध, डा. अजीत सिंह नैन, अधिष्ठाता, मत्स्य विज्ञान महाविद्यालय, डा. आर.एस. चैहान एवं मत्स्य विज्ञान महाविद्यालय के वैज्ञानिक, डा. ए.के. उपाध्याय, डा. अवधेष कुमार, डा. मालविका दास त्रकरू के साथ मत्स्य विज्ञान महाविद्यालय के समस्त विभागाध्यक्ष, शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित थे।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डा. नैन, ने मत्स्य पालकों से मत्स्य पालन की नवोन्मेषी पद्धतियों, बायोफ्लोक, आर.ए.एस., एक्वापोनिक्स आदि को अपनाने का आह्वान किया गया जिससे उनकी आय में वृद्धि हो सके।
अधिष्ठाता, मत्स्य विज्ञान महाविद्यालय, डा. चैहान, ने बताया कि विश्व के मत्स्य उत्पादन में भारत का योगदान 7.56 प्रतिशत है तथा राष्ट्र के सकल घरेलू उत्पाद में मात्स्यिकी अंश का योगदान 1.24 प्रतिशत है जबकि कृषि सकल घरेलू उत्पाद में 7.28 प्रतिशत है। डा. चैहान ने कहा कि मात्स्यिकी के क्षेत्र में लगभग 1.60 करोड़ व्यक्ति सीधे रूप में आजविका प्राप्त कर रहे हैं तथा मत्स्य उत्पादन के निर्यात से देश को लगभग 47 हजार करोड़ रूपये की राशि प्रतिवर्ष प्राप्त होती है। उन्होंने प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना का भरपूर लाभ उठाकर मात्स्यिकी के क्षेत्र की प्रगति में अपना अमूल्य योगदान देने हेतु मत्स्य पालकों एवं मत्स्य उद्यामियों से आह्वान किया।
इस अवसर पर डा. ए.के. उपाध्याय, डा. अवधेश कुमार, डा. मालविका दास त्रकरू द्वारा भी अपने विचार व्यक्त किये गये तथा कार्यक्रम का संचालन, डा. आशुतोष मिश्रा द्वारा किया गया। कार्यक्रम के दौरान मत्स्य पालकों को मछली के बीज उपलब्ध कराये गये तथा मछली की भी बिक्री की गई। कार्यक्रम में मत्स्य विज्ञान महाविद्यालय के समस्त विभागाध्यक्ष, शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

ई मेल चित्र सं. 1ः कार्यक्रम में मंचासीन निदेषक शोध, डा. अजीत सिंह नैन, अधिष्ठाता, मत्स्य विज्ञान, डा. आर.एस. चैहान एवं डा. ए.के. उपाध्याय।

*(एस.के. बंसल)*
*निदेशक संचार*

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