कृषि श्रमिकों की कमी के मद्देनजर धान की सीधी बुवाई का विकल्प दिया वैज्ञानिकों ने

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गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विष्वविद्यालय
पंतनगर, जिला- ऊधमसिंह नगर (उत्तराखण्ड)
*कृषि श्रमिकों की कमी के मद्देनजर धान की सीधी बुवाई का विकल्प दिया वैज्ञानिकों ने
पंतनगर। 26 मई 2020। पंतनगर विश्वविद्यालय के कृषि महाविद्यालय के सस्य विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों ने किसानों को धान की सीधी बुवाई की तकनीक अपनाने की सलाह दी है। श्रमिकों के पलायन करने के कारण उनके अभाव में धान की रोपाई किसानों के लिए चिन्ता का विषय बनी हुई है। ऐसे में वैज्ञानिकों ने कम श्रमिक व कम पानी के उपयोग से सीडड्रिल द्वारा धान की सीधी बुवाई करने को कहा है। सस्य वैज्ञानिक डा. वीरेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि सीडड्रिल द्वारा धान की सीधी बुवाई करने से न तो नर्सरी की आवष्कता तथा ना कदेड़ व रोपाई की आवष्यकता होती है। इस विधि में गेहूं की तरह ही खेत तैयार कर कुछ ही समय में बड़े प्रक्षेत्र की बुवाई सम्पन्न की जा सकती है। यही नहीं सीधी बुवाई करने से 25 से 30 प्रतिषत कम पानी का भी उपयोग होता है। कम श्रमिक, कम डीजल, एवं कम पानी के साथ अच्छा उत्पादन प्राप्त हो जाता है।
डा. सिंह ने बताया कि यदि अच्छी प्रकार से धान की ख्ेाती सीधी बुवाई विधि वैज्ञानिक तौर तरीकों से की जाती है तो 3-5 प्रतिषत ज्यादा उपज भी प्राप्त होती है। यही नहीं इस तकनीक के द्वारा धान की फसल भी 8-10 दिन पहले ही परिपक्व हो जाती है और रबी फसल की समय से बुवाई कर अच्छा उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
डा. सिंह ने बताया कि धान की सीधी बुवाई की सफलता के लिए खेत समतल होना चाहिए ताकि सीडड्रिल समान रुप से बीज एवं खाद गिराए व खेत की सतह पर पानी सामान रूप से वितरित हो। धान की बुवाई जून के मध्य में करनी चाहिए, ताकि वर्षा प्रारम्भ होने तक पौधा पूर्णतः स्थापित हो जाए। अच्छे जमाव के लिए भूमि में पर्याप्त नमी का होना आवष्यक है। उन्होंने कहा कि बीज 2-3 सेमी गहराई पर ही बोना चाहिए क्योंकि अधिक गहराई से जमाव कम होता है। उन्होंने बुवाई के तुरन्त बाद या 2-3 दिन के अन्दर जब खेत में नमी अच्छी हो, खरपतवारों के बीजों के जमाव से पूर्व भूमि सतह पर खरपतवारनाषी का छिड़काव करने की भी सलाह दी। डा. सिंह के अनुसार यदि खेत में चैड़ी पत्ती व मोथा वर्गीय एवं अन्य घास कुल के खरपतवार उग आयंे तो बुवाई के 3-5 पत्ती की अवस्था पर उन षाकनाषियों का प्रयोग करें जो सभी प्रकार के खरपतवारों को समूल नष्ट कर सकें। उन्होंने यह भी बताया कि यदि जमाव समान न हो व खेत में खाली जगह हो तो 3-4 सप्ताह बाद सिंचाई या वर्षा के बाद उसी खेत से कुछ पौधे उखाड़कर रिक्त स्थानोें पर रोपाई कर देनी चाहिए। जिंक की कमी के लक्षण दिखाई देने पर 0.5 प्रतिषत जिंक सल्फेट $ 2.0 प्रतिषत यूरिया का घोल बनाकर पानी के साथ खड़ी फसल में छिड़काव करना चाहिए।
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*प्रौद्योगिकी महाविद्यालय द्वारा जल अभियांत्रिकी पर अन्तर्राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन*
पंतनगर। 26 मई 2020। पंतनगर विश्वविद्यालय के प्रौद्योगिकी महाविद्यालय द्वारा 28 मई 2020 को एक अन्तर्राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन किया जा रहा है, जिसका विषय ‘एंट्राॅपी थ्योरी एंड इट्स एप्लिकेषन इन वाटर इंजीनियरिंग’ है। इस वेबीनार के विषेषज्ञ अमेरिका के टेक्सास ए एंड एम विष्वविद्यालय के प्रौ. विजय पी सिंह होंगे। प्रौ. सिंह हाईड्रोलाॅजी विषय के मूर्धन्य विद्वान हंै, जिनके 1286 शोध पत्र, 30 पुस्तकें, 72 सम्पादित पुस्तकें तथा अन्य अनेक प्रकाषन हैं। प्रौ. सिंह को अनेक अवार्ड व सम्मान भी प्राप्त हुए हैं। वेबीनार का उद्घाटन संबोधन पंतनगर विष्वविद्यालय के कुलपति, डा. तेज प्रताप, द्वारा दिया जायेगा तथा परिचयात्मक टिप्पणी महाविद्यालय की अधिष्ठात्री, डा. अलकनन्दा अषोक, द्वारा की जायेगी। इस वेबीनार की संयोजक प्रौद्योगिकी महाविद्यालय की प्रौ. ज्योति प्रसाद तथा माॅडरेटर प्रौ. एच.जे.शिव प्रसाद हैं।

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